santmat sangeet

Lord, you give up the garden.

  • प्रभू जी तुम औगन बकसन हार।
  • हऊं बहु नीच उधरों पातकी, मूर्ख निपट गंवार॥टेक॥
  • मो सम पतित अधम नहीं कोउ, शीन दुखी विसिआर।
  • नाम सुनहि नरकु भजै है, तुम्ह् बिन कवन हमार॥
  • पतित पावन विरद तिहारौ, आई परौं तोहि दुवार।
  • कहि रविदास इहु मन आसा, निज कर लेहु उबार॥
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