- Varṇan Mahatm-Bhakti Ka
- Jagat Bhav Bhay Lajja Chhodo. Sun Pyare Too Kar Bhakti ॥ 1 ॥
- Jati Baran Bhay Lajja Tyago. Sun Pyare Too Kar Bhakti ॥ 2 ॥
- Shatru Mitr ḍar Door Haṭa_O. Sun Pyare Too Kar Bhakti ॥ 3 ॥
- Mat Pita ḍar Chhod Gnva_O. Sun Pyare Too Kar Bhakti ॥ 4 ॥
- Joroo Ladke Mat ḍar Inase. Sun Pyare Too Kar Bhakti ॥ 5 ॥
- Bha_Ii Bhateejon Ka ḍar Mat Kar. Sun Pyare Too Kar Bhakti ॥ 6 ॥
- Sas Sasur ḍar Man Se Chhodo. Sun Pyare Too Kar Bhakti ॥ 7 ॥
- Bahoo Jama_Ii In Ka ḍar Taj. Sun Pyare Too Kar Bhakti ॥ 8 ॥
- Yar Ashana Sab ḍar Chhodo. Sun Pyare Too Kar Bhakti ॥ 9 ॥
- Natedar Kuṭumbee Jitane. Inaka ḍar Taj Kar Bhakti ॥ 10 ॥
- Bhakti Ang Men Jab Too Barate. Chhod Jhijhak In Kar Bhakti ॥ 11 ॥
- Jo Moorakh Hain Marm N Janen. Inaka ḍar Kya Kar Bhakti ॥ 12 ॥
- Inaka ḍar Kuchh Mat Kar Man Men. Sun Pyare Too Kar Bhakti ॥ 13 ॥
- Bheṣ Bheṣ Ko Dekh Lajave. So Bhee Kachcha Kar Bhakti ॥ 14 ॥
- Jab Lag Sab Se Niḍar N Hove. Tab Lag Kachcha Kar Bhakti ॥ 15 ॥
- Zaillat Ijjat Jo Kuchh Hove. Mauj Vicharon Kar Bhakti ॥ 16 ॥
- Guru Ka Bal Hirade Dhar Apane. Sun Pyare Too Kar Bhakti ॥ 17 ॥
- Yah Bigad Kuchh Karen N Tera. Kyon Jhijhake Too Kar Bhakti ॥ 18 ॥
- Bina Mauj Guru Kuchh Nahin Hota. Sun Pyare Too Kar Bhakti ॥ 19 ॥
- Too Kachcha Yah Kare Kacha_Ii. Aur Kahoon Kya Kar Bhakti ॥ 20 ॥
- Karate Karate Pakka Hoga. Aur Upav N Kar Bhakti ॥ 21 ॥
- Kachchee Se Pakkee Hoy Ik Din. Chhod Kapaṭ Too Kar Bhakti ॥ 22 ॥
- Kapaṭ Bhakti Kuchh Kam N Ave. Sachchee Kachchee Kar Bhakti ॥ 23 ॥
- RadhaSwami Kahat Suna_Ii. Jaisee Bane Taisee Kar Bhakti ॥ 24 ॥
Bachan 2 Shabad 2
- वर्णन महात्म-भक्ति का
- जगत भाव भय लज्जा छोड़ो। सुन प्यारे तू कर भक्ति॥1॥
- जाति बरन भय लज्जा त्यागो। सुन प्यारे तू कर भक्ति॥2॥
- शत्रु मित्र डर दूर हटाओ। सुन प्यारे तू कर भक्ति॥3॥
- मात पिता डर छोड़ गँवाओ। सुन प्यारे तू कर भक्ति॥4॥
- जोरू लड़के मत डर इनसे। सुन प्यारे तू कर भक्ति॥5॥
- भाई भतीजों का डर मत कर। सुन प्यारे तू कर भक्ति॥6॥
- सास ससुर डर मन से छोड़ो। सुन प्यारे तू कर भक्ति॥7॥
- बहू जमाई इन का डर तज। सुन प्यारे तू कर भक्ति॥8॥
- यार आशना सब डर छोड़ो। सुन प्यारे तू कर भक्ति॥9॥
- नातेदार कुटुम्बी जितने। इनका डर तज कर भक्ति॥10॥
- भक्ति अंग में जब तू बरते। छोड़ झिझक इन कर भक्ति॥11॥
- जो मूरख हैं मर्म न जानें। इनका डर क्या कर भक्ति॥12॥
- इनका डर कुछ मत कर मन में। सुन प्यारे तू कर भक्ति॥13॥
- भेष भेष को देख लजावे। सो भी कच्चा कर भक्ति॥14॥
- जब लग सब से निडर न होवे। तब लग कच्चा कर भक्ति॥15॥
- ज़िल्लत इज्जत जो कुछ होवे। मौज विचारों कर भक्ति॥16॥
- गुरु का बल हिरदे धर अपने। सुन प्यारे तू कर भक्ति॥17॥
- यह बिगाड़ कुछ करें न तेरा। क्यों झिझके तू कर भक्ति॥18॥
- बिना मौज गुरु कुछ नहिं होता। सुन प्यारे तू कर भक्ति॥19॥
- तू कच्चा यह करे कचाई। और कहूं क्या कर भक्ति॥20॥
- करते करते पक्का होगा। और उपाव न कर भक्ति॥21॥
- कच्ची से पक्की होय इक दिन। छोड़ कपट तू कर भक्ति॥ 22॥
- कपट भक्ति कुछ काम न आवे। सच्ची कच्ची कर भक्ति॥ 23॥
- राधास्वामी कहत सुनाई। जैसी बने तैसी कर भक्ति॥ 24॥
बचन 2: शब्द 2
- ਬਰਨਨ ਮਹਾਤਮ ਭਗਤੀ ਕਾ
- ਜਗਤ ਭਾਵ ਭੈ ਲੱਜਾ ਛੋੜੋ। ਸੁਨ ਪਿਆਰੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 1 ॥
- ਜ਼ਾਤ ਬਰਨ ਭੈ ਲੱਜਾ ਤਿਆਗੋ। ਸੁਨ ਪਿਆਰੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 2 ॥
- ਸ਼ਤ੍ਰ ਮਿਤ੍ਰ ਡਰ ਦੂਰ ਹਟਾਓ। ਸੁਨ ਪਿਆਰੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 3 ॥
- ਮਾਤ ਪਿਤਾ ਡਰ ਛੋੜ ਗਵਾਓ। ਸੁਨ ਪਿਆਰੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 4 ॥
- ਜੋਰੂ ਲੜ ਕੇ ਮਤ ਡਰ ਇਨ ਸੇ। ਸੁਨ ਪਿਆਰੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 5 ॥
- ਭਾਈ ਭਤੀਜੋਂ ਕਾ ਡਰ ਮਤ ਕਰ। ਸੁਨ ਪਿਆਰੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 6 ॥
- ਸਾਸ ਸਸੁਰ ਡਰ ਮਨ ਸੇ ਛੋੜੋ। ਸੁਨ ਪਿਆਰੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 7 ॥
- ਬਹੂ ਜਮਾਈ ਇਨ ਕਾ ਡਰ ਤਜ। ਸੁਨ ਪਿਆਰੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 8 ॥
- ਯਾਰ ਆਸ਼ਨਾ ਸਬ ਡਰ ਛੋੜੋ। ਸੁਨ ਪਿਆਰੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 9 ॥
- ਨਾਤੇਦਾਰ ਕੁਟੰਬੀ ਜਿਤਨੇ। ਇਨਕਾ ਡਰ ਤਜ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 10 ॥
- ਭਗਤੀ ਅੰਗ ਮੇਂ ਜਬ ਤੂ ਬਰਤੇਂ। ਛੋੜ ਝਿਝਕ ਇਨ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 11 ॥
- ਜੋ ਮੂਰਖ ਹੈਂ ਮਰਮ ਨ ਜਾਨੇਂ। ਇਨਕਾ ਡਰ ਕਿਆ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 12 ॥
- ਇਨ ਕਾ ਡਰ ਕੁਛ ਮਤ ਕਰ ਮਨ ਮੇਂ । ਸੁਨ ਪਿਆਰੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 13 ॥
- ਭੇਖ ਭੇਖ ਕੋ ਦੇਖ ਲਜਾਵੇ। ਸੋ ਭੀ ਕੱਚਾ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 14 ॥
- ਜਬ ਲਗ ਸਬ ਸੇ ਨਿਡਰ ਨ ਹੋਵੇ। ਤਬ ਲਗ ਕੱਚਾ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 15 ॥
- ਜ਼ਿੱਲਤ ਇੱਜ਼ਤ ਜੋ ਕੁਛ ਹੋਵੇ। ਮੌਜ ਬਿਚਾਰੇ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 16 ॥
- ਗੁਰੂ ਕਾ ਬਲ ਹਿਰਦੇ ਧਰ ਅਪਨੇ । ਸੁਨ ਪਿਆਰੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 17 ॥
- ਯੇ ਬਿਗਾੜ ਕੁਛ ਕਰੇਂ ਨ ਤੇਰਾ। ਕਿਉਂ ਝਿਝਕੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 18 ॥
- ਬਿਨਾ ਮੌਜ ਗੁਰੂ ਕੁਛ ਨਹਿੰ ਹੋਤਾ। ਸੁਨ ਪਿਆਰੇ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 19 ॥
- ਤੂ ਕੱਚਾ ਯਹ ਕਰੇ ਕਚਾਈ। ਔਰ ਕਹੂੰ ਕਿਆ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 20 ॥
- ਕਰਤੇ ਕਰਤੇ ਪੱਕਾ ਹੋਗਾ। ਔਰ ਉਪਾਉ ਨ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 21 ॥
- ਕੱਚੀ ਸੇ ਪੱਕੀ ਹੋਇ ਇਕ ਦਿਨ। ਛੋੜ ਕਪਟ ਤੂ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 22 ॥
- ਕਪਟ ਭਗਤੀ ਕੁਛ ਕਾਮ ਨ ਆਵੇ। ਸੱਚੀ ਕੱਚੀ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 23
- ਰਾਧਾਸੁਆਮੀ ਕਹਤ ਸੁਨਾਈ। ਜੈਸੀ ਬਨੇ ਤੈਸੀ ਕਰ ਭਗਤੀ॥ 24 ॥
ਬਚਨ 12: ਸ਼ਬਦ 2