santmat sangeet

Ramkali Bani of Ravidas ji

रामकली बाणी रविदास जी की
  • पड़ीऐ गुनीए नामु सभु सुनीए अनभठ भाउ न दरसै॥
  • लोहा कंचनु हिरन होइ कैसे जठ पारसहि न परसै॥
  • देव संसे गांठि न छूटे ॥
  • काम क्रोध माइआ मद मतसर इन पंचहु मिलि लूटे॥ रहाउ॥
  • हम बड कबि कुलीन हम पंडित हम जोगी संनिआसी॥
  • गिआनी गुनी सूर हम दाते इह बुधि कबहि न नासी॥
  • कहु रविदास सभे नहीं समझसि भूलि परे जैसे बउरे॥
  • मोहि अधारु नामु नाराइन जीवन प्रांन धन मोरे॥
  • प्रभु जी संगति सरनि तिहारी। जग जीवन राम मुरारी॥ टेक॥
  • गली गली कौ नीर बहि आयो, सुरसरी जाइ समायो।
  • संगति कै परताप महातम, नांव गंगोदिक पायो॥
  • स्वांति बूंद बरषैं फनि ऊपर, सीस विषै विष होई।
  • वाही बूंद को मोती निपजै संगति की अधिकाई॥
  • तुम चंदन हम इरंड बापुरे, निकटि तुम्हारे बासा।
  • नीच ब्रिष ते ऊँच भए हैं, तुम्ही बास सुबासा॥
  • जाति भी ओछी पांति भी ओछी, ओछा कसब हमारा।
  • तुम्हरी क्रिपा तैं ऊंच भए हैं, कहै रविदास चमारा॥
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